उज्जैन। सिंहस्थ -28 के पूर्व विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। मंदिर प्रबंध समिति जल्द ही परिसर में अत्याधुनिक ‘सशुल्क डिजिटल लॉकर’ सुविधा शुरू करने जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं को मोबाइल, जूता-चप्पल और अन्य सामान रखने के लिए लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। मंदिर समिति ने इसके लिए निजी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह पूरी व्यवस्था आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी। श्रद्धालुओं को केवल क्यूआर कोड स्कैन करना होगा, अपनी भाषा चुननी होगी और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। डिजिटल भुगतान के बाद उन्हें एक विशेष क्यूआर कोड या ओटीपी मिलेगा, जिसके माध्यम से वे अपना सामान सुरक्षित रख सकेंगे और वापस प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रोजेक्ट में वेब-आधारित प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप, ऑनलाइन पेमेंट और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी, जिससे मंदिर प्रशासन एक क्लिक पर लॉकर की उपलब्धता और आय की निगरानी कर सकेगा। शुल्क पर मंदिर समिति का नियंत्रण होगा- फिलहाल लॉकर सुविधा के शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। निविदा प्रक्रिया के बाद वेंडर के आने पर शुल्क का निर्धारण मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक द्वारा किया जाएगा। मंदिर समिति के पास शुल्क की अधिकतम सीमा तय करने और उसे नियंत्रित करने के पूर्ण अधिकार होंगे। चयनित एजेंसी को 24 घंटे सेवा प्रदान करने के साथ ही साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और आपदा प्रबंधन के कड़े मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। प्रतिबंध सख्ती से लागू हो सकेंगे- वर्तमान में सुरक्षा कारणों से मंदिर में मोबाइल और अन्य वस्तुओं पर प्रतिबंध है, जिसके चलते श्रद्धालुओं को सामान रखने के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना पड़ता है। नई डिजिटल प्रणाली से यह प्रक्रिया सुव्यवस्थित और पारदर्शी हो जाएगी। यदि यह परियोजना समय पर लागू होती है, तो महाकाल मंदिर उन चुनिंदा धार्मिक स्थलों में शामिल हो जाएगा जहाँ तकनीक-संचालित लॉकर सुविधा श्रद्धालुओं को एक बेहतर अनुभव प्रदान करेगी। अब एक मोबाइल नंबर पर तीन महीने में सिर्फ एक बार अनुमति- भगवान महाकाल की भस्म आरती में बार-बार अनुमति लेने वालों पर अब मंदिर समिति ने सख्ती कर दी है। अब एक बार अनुमति लेने के बाद उसी मोबाइल नंबर से दोबारा बुकिंग के लिए 90 दिन का इंतजार करना होगा। नए नियम के तहत अब कोई भी श्रद्धालु, चाहे आम हो या प्रोटोकॉल वाला, एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में केवल एक बार ही भस्म आरती की अनुमति ले सकेगा। वर्ष 2024 में भी तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने भस्म आरती की बुकिंग में धांधली की शिकायतों के बाद एक आधार और एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में एक बार अनुमति का नियम बनाया था। कुछ समय तक ये व्यवस्था चली, लेकिन बाद में बंद कर दी गई थी। महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने साफ किया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है। अब इसे और प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है ताकि आम श्रद्धालुओं को भी आसानी से दर्शन का मौका मिले। इस नियम से उन आम भक्तों को फायदा होगा जो महीनों तक ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते थे। अब वीआईपी और बार-बार दर्शन करने वालों की मोनोपॉली भी टूटेगी। मंदिर समिति का दावा है कि इससे भस्म आरती में पारदर्शिता बढ़ेगी।